RESISTANCE OF JATS AND REVOLT OF SATNAMIS (जाटों का प्रतिरोध एवं सतनामियों का विद्रोह)
प्रश्न 1. जाट।
उत्तर- जाट हरियाणा, पंजाब, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के निवासी थे। ये बहुत वीर थे। वे किसी भी कीमत पर अपनी जाति का अपमान सहने को तैयार नहीं होते थे औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान जाटों के विरुद्ध ऐसी नीतियाँ अपनाई कि वे मुगल साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए विवश हो गए। 1669 ई० में विलपत के जाट नेता गोकुल ने सर्वप्रथम मुगलों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। उसके कार्य को राजाराम, चूड़ामन, बदन सिंह तथा सूरजमल ने आगे बढ़ाया।
प्रश्न 2. जाटों ने मुगलों के विरुद्ध विद्रोह क्यों किया ?
उत्तर- (i) औरंगजेब की हिंदुओं के विरुद्ध धार्मिक नीति को जाट सहन करने को तैयार नहीं थे। (ii) औरंगजेब ने हिंदुओं को मुसलमानों की अपेक्षा अधिक कर देने के लिए बाध्य किया। (iii) औरंगजेब के शासनकाल में मथुरा के जाटों का बहुत उत्पीड़न किया गया।
प्रश्न 3. गोकुल।
उत्तर- गोकुल जाटों का सर्वप्रथम नेता था जिसने 1669 ई० में मुगल साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह का झंडा बुलंद किया। यह तिलपत का समींदार था। वह बहुत पराक्रमी, साहसी एवं स्वाभिमानी सरदार था उसने जाट कृषकों को अत्याचारों मुगल साम्राज्य के विरुद्ध एकत्रित करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उसे मुगल सेना ने बंदी बना लिया तथा जनवरी 1670 ई० में मृत्यु दंड दे दिया।
प्रश्न 4. राजाराम |
उत्तर- राजाराम जाटों का दूसरा महत्त्वपूर्ण नेता था। वह सिनसिनी के जमींदार भन्जा सिंह का पुत्र था। वह औरंगजेब द्वारा जाटों के विरुद्ध अपनाई गई जा रही दमन की नीति को सहन करने को तैयार नहीं था। अतः उसने 1686 ई० में जाटों का नेतृत्व संभाला। उसने जाटों को मुगलों के साथ संघर्ष करने के लिए अपने झंडे के अधीन एकत्रित किया। उसने जाटों को अनुशासन में रहना सिखाया। राजाराम 1688 ई० में मुगलों के साथ हुए एक संघर्ष में मारा गया।
प्रश्न 5. चूड़ामन ।
उत्तर- चूड़ामत की गणना जाटों के प्रसिद्ध नेताओं में की जाती है। वह राजाराम का भतीजा था। उसने 1695 ई० से 1721 ई० तक जाटों की शक्ति के उत्थान में उल्लेखनीय योगदान दिया। वह एक योग्य नेता तथा कुशल राजनीतिज्ञ था। उसने अपनी अभूतपूर्व क्षमता के चलते जाटों में मुगलों के विरुद्ध चलने वाले संघर्ष में संजीवनी का संचार किया। उसने अपनी सैनिक प्रतिभा एवं कूटनीतिक चतुराई से जाट शक्ति को उत्तरी भारत की प्रमुख शक्तियों में स्थान दिलाया।
प्रश्न 6. यदन सिंह।
उत्तर—बदन सिंह जाटों का एक अन्य प्रसिद्ध नेता था। उसने 1723 ई० से लेकर 1756 ई० तक जाटों का नेतृत्व किया। उसने जाटों को एकता के सूत्र में पिरोने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उसने अपना प्रभाव बढ़ाने के उद्देश्य से प्रसिद्ध जाटों के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित किए। वह लूटमार की नीति के विरुद्ध था। उसने जाट राज्य की सुरक्षा के लिए एक शक्तिशाली सेना का निर्माण किया। बदन सिंह ने डीग को अपनी राजधानी घोषित किया तथा इसे भव्य भवनों दुर्गा तथा सुंदर बगीचों से सुसज्जित किया।
प्रश्न 7. सूरजमल । अथवा जाटों का प्लेटो ।
उत्तर- जाटों के इतिहास में सूरजमल को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। उसने 1756 ई० से लेकर 1763 ई० तक भरतपुर से शासन किया। किंतु उसने अपनी योग्यता, साहस एवं अथक प्रयासों के चलते जाट राज्य को एक शक्तिशाली एवं खुशहाल राज्य में परिवर्तित करने में उल्लेखनीय योगदान दिया। सूरजमल ने अपनी कूटनीति एवं साहस द्वारा राजपूतों, मराठों, अफ़गानों, मुग़लों एवं रुहेलों को भी चकित कर दिया था। वह एक कुशल प्रशासक भी प्रमाणित हुआ। इसलिए उसे जाटों का प्लेटो भी कहा जाता है।
प्रश्न 8. सूरजमल क्यों प्रसिद्ध था ?
उत्तर- (i) उसने भरतपुर में एक विशाल जाट राज्य की स्थापना की। (ii) वह एक कुशल शासन प्रशासक था। उसने अनेक प्रशासनिक सुधारों को लागू किया। (iii) उसने राज्य की अर्थव्यवस्था एवं सेना को सुदृढ़ किया। (iv) उसने कला तथा साहित्य को प्रोत्साहित किया । (v) उसने सभी धर्मों के प्रति सहनशीलता की नीति को अपनाया।
प्रश्न 9. सतनामी |
उत्तर-सतमानी हिंदुओं का एक धार्मिक संप्रदाय था। इसकी स्थापना 1543 ई० में वीरभान ने नरनौल के समीप ब्रिजेसर में की थी। इस संप्रदाय के लोग ईश्वर के सच्चे नाम की उपासना पर बल देते थे इसलिए वे सतनामी कहलाए।. वे समाज में प्रचलित अंध-विश्वासों के विरुद्ध थे। वे ग़रीबों से बहुत हमदर्दी रखते थे। उन्होंने 1672 ई० में औरंगज़ेब की धार्मिक एवं आर्थिक नीतियों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। औरंगज़ेब ने उनका सख्ती से दमन कर दिया।
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