संदेश

उदारवादी (THE MODERATES)

 अपनी स्थापना के प्रारम्भिक 20 वर्षों (1885-1905) तक कांग्रेस की नीति अत्यन्त उदार रही। इसलिए इस युग को इतिहास में ‘उदारवादी राष्ट्रीयता का युग' या उदारवादी युग कहा जाता है। इस युग के दौरान कांग्रेस की बागडोर ऐसे लोगों के हाथों में थी जो ब्रिटिश सरकार से संघर्ष मोल लेना नहीं चाहते थे तथा वे सरकार के साथ सहयोग करके उससे प्रार्थना एवं अनुरोध करके ही अपने उद्देश्य को प्राप्त करना चाहते थे। वे अंग्रेजी सरकार के समर्थक एवं प्रशसक थे तथा ब्रिटिश शासन को भारतीयों के लिए वरदान मानते थे। पर ब्रिटिश विचारधारा, साहित्य एवं सभ्यता का उन पर बहुत अधिक प्रभाव था। वे इंग्लैण्ड की संस्थाओं के प्रशंसक थे तथा अंग्रेजों की न्यायप्रियता में पूर्ण विश्वास रखते थे। वे अंग्रेजी शासन के भक्त थे। उनका विश्वास था कि यदि वे प्रार्थना-पत्रों के माध्यम से अपनी माँगें सरकार के सामने रखेंगे तो सरकार उन्हें अवश्य ही स्वीकार कर लेगी। उन्होंने जनता की माँगों को प्रार्थना-पत्रों, स्मृति-पत्रों एवं प्रतिनिधि मण्डलों के द्वारा सरकार तक पहुँचाया तथा प्रशासन में सुधार संबंधी अनेक प्रस्ताव पास किए। उस समय तक जनता में राष्...

Imperialism (साम्राज्यवाद)

  Q1:- साम्राज्यवाद के अर्थ से आप क्या समझते हो। साम्राज्यवाद के प्रमुख कारणों का वर्णन करो। (What is mean by Imperialism ? Main causes of Imperialism. Describe.)  19वीं शताब्दी के यूरोप के अधिकतर देश एशिया तथा अफ्रीका के देशों का आर्थिक शोषण करने लगे तथा शताब्दी के उत्तरार्द्ध में इस शोषण की दौड़ तेज हो गई व दूसरी तरफ इन देशों के बीच अपने स्वार्थी की होड़ भी आरंभ हो गई। परिणामस्वरूप ये देश एशिया तथा अफ्रीका के भू-भागों पर अपना आधिपत्य स्थापित करने का प्रयास करने लगे। यूरोपीय राष्ट्रों द्वारा आधिपत्य स्थापना की यह कोशिश 'साम्राज्यवाद' कहलायी । साम्राज्यवाद का अर्थ (Meaning of Imperialism) एक राजनीतिक अवधारणा, व्यवस्था तथा आचरण के रूप में साम्राज्यवाद उतना ही प्राचीन है जितना राज्य परंतु साम्राज्यवाद का अर्थ व स्वरूप भिन्न-भिन्न युगों में कई आधारों पर बदलता रहता है। साधारण अर्थ में साम्राज्यवाद का अभिप्राय एक विशाल आकार की राज्य व्यवस्था से लिया जाता है जिसके अंतर्गत अनेक राष्ट्र तथा देश एक केंद्रीकृत राजनीतिक सत्ता की अधीनता में रहते हैं और साम्राज्य के अधिपति को सम्राट की संज...

RESISTANCE OF JATS AND REVOLT OF SATNAMIS (जाटों का प्रतिरोध एवं सतनामियों का विद्रोह)

 प्रश्न 1. जाट।  उत्तर- जाट हरियाणा, पंजाब, राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश के निवासी थे। ये बहुत वीर थे। वे किसी भी कीमत पर अपनी जाति का अपमान सहने को तैयार नहीं होते थे औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान जाटों के विरुद्ध ऐसी नीतियाँ अपनाई कि वे मुगल साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह करने के लिए विवश हो गए। 1669 ई० में विलपत के जाट नेता गोकुल ने सर्वप्रथम मुगलों के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। उसके कार्य को राजाराम, चूड़ामन, बदन सिंह तथा सूरजमल ने आगे बढ़ाया।  प्रश्न 2. जाटों ने मुगलों के विरुद्ध विद्रोह क्यों किया ?  उत्तर- (i) औरंगजेब की हिंदुओं के विरुद्ध धार्मिक नीति को जाट सहन करने को तैयार नहीं थे। (ii) औरंगजेब ने हिंदुओं को मुसलमानों की अपेक्षा अधिक कर देने के लिए बाध्य किया। (iii) औरंगजेब के शासनकाल में मथुरा के जाटों का बहुत उत्पीड़न किया गया।  प्रश्न 3. गोकुल। उत्तर- गोकुल जाटों का सर्वप्रथम नेता था जिसने 1669 ई० में मुगल साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह का झंडा बुलंद किया। यह तिलपत का समींदार था। वह बहुत पराक्रमी, साहसी एवं स्वाभिमानी सरदार था उसने जाट कृषकों को अत्याचार...